असम्भव सिर्फ सोच का कमाल हैं
असम्भव सिर्फ हमारी सोच का कमाल हैं हमेसा हम सोचते रहते है
की क्या हम इस कार्य को कर पऐंगे क्या यह संभव हैं, अन्ततः हमें लगता हैं कि यह तो
असंभव हैं , हमारी सोच की शुरुवात यही से होती हैं । वर्षो तक चार मिनट में एक मील
दौडना असंभव कार्य माना जाता था, पर जिस तरह रोजर बैनिस्टर ने 3 मिनट 59 सेकण्ड
में एक मील भागकर इस मिथक को तोड कर एक मिसाल बना दिया,,और यह दर्शा दिया की कोई
भी कार्य असंभव नही हैं । हम कुछ करने की सोचते भर हैं और फिर सोच लेते हैं कि यह
संभव नही हैं , कही ना कही हममें अत्मविश्वास की कमी साफ नजर आती हैं ,,हमेशा हमें
सकारात्मक सोच के साथ कार्य करना चाहिए । जरुरत हैं हमें मष्तिष्क में पडे रुकावट
के घेरो को तोडने की ,, तथा असंभव ल्क्षय को संभव मानकर उस पर कार्य करने की , हमारे
ल्क्षय से हमें भटकाने वाले बहोत मिलेगें । अपने आप पर हमें पूरा विश्वास करना चाहिए , विश्वास हमें निर्णय
लेने में संक्षम बनाता हैं , किसी उद्देश्य की सफलता हमारे विश्वास पर निर्भर करती
हैं ,कि हम उस उद्देश्य के लायक हैं या नही । हमारा विश्वास और फोकस , हमारे पिछले
अनुभवो पर निर्भर करता हैं । हमारी सोच नकारात्मक ज्यादा होती हैं साकारात्मक कम
,, जो हमारी सबसे बडी कमी हैं जिसे दूर करने की सख्त जरुरत हैं । बस हमें सोचने की
देरी हैं, अगर दृढ़ निर्णय के साथ हमनें कुछ करने की ठान ली तो उसे सकारात्मक सोच
के साथ अवश्य पूरा कर सकते हैं । बिल गेट्स नें कम्प्यूटर देखा तक नही था फिर भी सॉफ्टवेयर देने का वादा किया ,,
यह उनकी निश्चितता की सोच थी , पायः हमारा मष्तिष्क सच्चे अनुभवो तथा कल्पनो में
भेंद नही कर पाता , आइंसटीन नें कहा था कि ज्ञान से ज्यादा वकतवर शक्ति हैं । अपने
जीवन काल से हमें असंभव शब्द निकालकर फेक देना चाहिए और सकारात्मक सोच के साथ आगे
बढ़ना चाहिए ,कडी परिश्रम से कुछ भी पाना संभव हैं , असंभव कुछ भी नही ,, पत्थर पर
भी लकीर बनाया जा सकता हैं । , बस सोच बुलंद होनी चाहिए.......Pandit.Ashish shukla
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