Dec 12, 2013

अच्छे लोग अपनी पार्टी छोड़कर आएं, हम उनका स्वागत करेंगें _केजरीवाल

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी [आप] के संयोजक और विधायक दल के नेता अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि अच्छे लोग अगर अपनी पार्टी छोड़कर आएं तो हम उनका स्वागत करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पूरी पार्टी की राय है कि हम न तो किसी का समर्थन लेंगे और न ही किसी को समर्थन देंगे। वहीं, उन्होंने प्रशांत भूषण के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह उनका निजी बयान है। इससे पार्टी का कोई सरोकार नहीं है। गौरतलब है कि प्रशांत भूषण ने भाजपा को समर्थन की पेशकश की बात कही थी।
इससे पूर्व आप के नेता प्रशांत भूषण अपने दिए गए बयान से पलट गए। भाजपा को समर्थन की पेशकश वाले बयान पर अब उनका कहना है कि मेरे बयान को गलत ढंग से पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि हम न तो समर्थन लेंगे और न ही किसी पार्टी को समर्थन देंगे। इसके पूर्व उन्होंने भाजपा को समर्थन की पेशकश की थी, जिसे पहले उनके ही दल ने और फिर भाजपा ने खारिज कर दिया था। मामला बढ़ता देख प्रशांत भूषण ने भी पलटी मारना ही उचित समझा।

Dec 10, 2013

संस्कृति का निर्माण

किसी देश की संस्कृति उसकी सम्पूर्ण मानसिक निधि को सूचित करती है। यह किसी खास व्यक्ति के पुरुषार्थ का फल नहीं, अपितु असंख्य ज्ञात तथा अज्ञात व्यक्तियों के भगीरथ प्रयत्न का परिणाम होती है। सब व्यक्ति अपनी सामर्थ्य और योग्यता के अनुसार संस्कृति के निर्माण में सहयोग देते हैं। संस्कृति की तुलना आस्ट्रेलिया के निकट समुद्र में पाई जाने वाली मूँगे की भीमकाय चट्टानों से की जा सकती है। मूँगे के असंख्य कीड़े अपने छोटे घर बनाकर समाप्त हो गए। फिर नए कीड़ों ने घर बनाये, उनका भी अन्त हो गया। इसके बाद उनकी अगली पीढ़ी ने भी यही किया और यह क्रम हजारों वर्ष तक निरन्तर चलता रहा। आज उन सब मूगों के नन्हे-नन्हे घरों ने परस्पर जुड़ते हुए विशाल चट्टानों का रूप धारण कर लिया है। संस्कृति का भी इसी प्रकार धीरे-धीरे निर्माण होता है और उनके निर्माण में हजारों वर्ष लगते हैं। मनुष्य विभिन्न स्थानों पर रहते हुए विशेष प्रकार के सामाजिक वातावरण, संस्थाओं, प्रथाओं, व्यवस्थाओं, धर्म, दर्शन, लिपि, भाषा तथा कलाओं का विकास करके अपनी विशिष्ट संस्कृति का निर्माण करते हैं। भारतीय संस्कृति की रचना भी इसी प्रकार हुई है।

Dec 9, 2013

ये हैं जिंदगी
हसतें रहना हैं जिंदगी , खुद को पाना हैं जिदगी
मौसम से सुहाना हैं जिंदगी,अच्छा बुरा दिखाना हैं जिंदगी
कभी खुशी कभी गम ये फसाना है जिंदगी .......
ख्वाब को पाना हैं जिंदगी ,कर्तव्य कों निभाना हैं जिंदगी
कभी खुश कर जाती है जिंदगी ,कभी रुला जाती हैं जिंदगी
ये फसाना हैं जिंदगी ..ये फसाना हैं जिंदगी
खुद को दिखाना हैं जिंदगी ,खुद को छिपाना हैं जिंदगी
सब कुछ लाती हैं जिंदगी ,सब कुछ ले जाती हैं जिंदगी
कभी आसमा पर चढ़ाती हैं जिंदगी ,कभी जमी पर गिराती हैं जिंदगी
फूलो सी खिल जाती हैं जिंदगी ,कभी झा़र बन जाती हैं जिंदगी
क्या कुछ नही कराती हैं जिंदगी ,अच्छे-अच्छे को सबक सिखाती हैं जिंदगी
ये फसाना हैं जिंदगी................2
मौसम की तरह बदल जाती हैं जिंदगी ,पत्तो की तरह बिखर जाती हैं जिंदगी
सब कुछ कराती हैं जिंदगी ,मेरे दोस्त मुड़ कर देखो बुलाती हैं जिंदगी
संर्घष ही हैं जिंदगी .....ये फसाना हैं जिंदगी  ...............2
जीवन सुख-दु:ख खेल है ।
 
दुःख तथा सुख किस प्रकार हमारे भाग्य की दिशा तय करते हैं ।हमारे पास दुःख का सामना करने के सरल उपाय हमेशा मौजूद होते हैं । कभी हम शराब पीते हैं तो कभी सिगरेट । जबकि कुछ ऐसे भी लोग हैं , जो मानसिक दबाव का मुकाबला व्यायाम ,सैर आदि उपायों द्वरा करते है ।हमारे सपनों पर अक्सर असफलता के बादल छाए रहने की कोशिश करते हैं । हम अपने सपनों तथा उद्देश्यों के लिए जोखिम उठाने की अपेक्षा अपने पास जो कुछ है , उससे चिपके रहना चाहते हैं।  परन्तु अगर हम परेशानियों/दुःखों को दोस्त के रुप में स्वीकार करे तो फिर परेशानिया हमारा साथ छोड़ सकती है ।  हम यह सोचते हैं कि कुछ भी करें उससे कोई फर्क नही पडता परन्तु ऐसा करके तो हमें सिर्फ दुःख ही प्राप्त हैं। यह सच्चाई हैं कि संबंधों में बंधे रहना दुखद तो हैं ।लेकिन यदि हम इससे बाहर निकलते है । तब अपने आप को अकेला व सबसे अभागा महसूस करते हैं । पुराने दुखद अनुभवो को याद करते है  ,फिर इस बारे में कुछ करने के लिए आतुर हो जाते हैं ।परन्तु जब  कुछ नही कर पाते,तब अपने आप को भावुकता की दहलीज पर पाते है,व भावुकता के चरम बिंदु को छूने के बाद ही हम परेशानियों का सामना करने में सामर्थ हो पाते है । जीवन में हम कभी न कभी स्वयं को  क्रुद्ध ,कुंठित तथा संकट में पड़ा हुआ अवश्य महसूस करते हैं ।हमें अपने ध्यान के केंद्र बिंदु में परिवर्तन लाना होगा । शारीरिक अवस्था में बदलाव भी महत्वपूर्ण होता है, जब कोई गुस्सा तनाव या अवसाद की स्थिति में होता है ,तब प्रायःवह धूम्रपान , मद्धपान आदि नकारात्मक क्रियाओं की तरफ मुड़ जाता है । परन्तु इस नकारात्मक  अवस्था से निकलनें का सहज उपाय है,हम प्रायः व्यायाम, करके संगीत सुनके इससे छुटकारा पा सकते हैं ।   हमारा क्रेंदित ध्यान हमारी भावनाओं को निश्चित करता हैं ,हमारी भावनाएं ,सोच और हमारे ख्याल हमारी भावनाओं को निश्चित करता है । जीवन तो बस दुःख सुख का एक हिस्सा हैं।
पृथ्वी शॉ
            
मबंई के महज चौदह वर्ष के इस होनहार बच्चे नें रच डाला इतिहास ।
मुबंई के आजाद मौदान पर  शील्ड टूर्नामेंट में 330 गेंदो में 546 रन बना डाले
यह पहला अवसर है ।  जब किसी भारतीय बल्लेबाज ने यह कारनामा किया हो
पृथ्वी नें अपनी पारी में 85 चौके और 5 छंके लगाये ।
पृथ्वी अडंर -16 के कप्तान भी है ।यह वही टूर्नामेंट है जिसमे सचिन और कांबली नें
664 रन की साजेदारी की थी । कही न कही पृथ्वी में सचिन की छवि नजर आती है।