Dec 13, 2014


मेरी द्वारा लिखी गयी पहली कविता.....
सोमवार, 9 दिसम्बर 2013
ये है जिंदगी……….ये है जिंदगी
हसते रहना है जिंदगी, खुद को पाना है जिदगी
मौसम से सुहाना है जिंदगी, अच्छा बुरा दिखाना है जिंदगी
कभी खुशी कभी गम ये फसाना है जिंदगी .......
ख्वाबो को पाना है जिंदगी, कर्तव्य कों निभाना है जिंदगी
कभी खुश कर जाती है जिंदगी, कभी रुला जाती है जिंदगी
ये फसाना हैं जिंदगी..ये फसाना है जिंदगी
खुद को दिखाना है जिंदगी, खुद को छिपाना है जिंदगी
सब कुछ लाती है जिंदगी, सब कुछ ले जाती है जिंदगी
कभी आसमा पर चढ़ाती है जिंदगी, कभी ज़मी पर गिराती है जिंदगी
फूलो सी खिल जाती है जिंदगी, कभी झार बन जाती है जिंदगी
क्या कुछ नही कराती है जिंदगी, अच्छे-अच्छे को सबक सिखाती है जिंदगी
ये फसाना हैं जिंदगी................2
मौसम की तरह बदल जाती है जिंदगी, पत्तो की तरह बिखर जाती हैं जिंदगी
सब कुछ कराती है जिंदगी, मेरे दोस्त मुड़ कर देखो बुलाती हैं जिंदगी
संर्घष ही है जिंदगी .....ये फसाना है जिंदगी  ....आशीष शुक्ला 

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